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sarahlouise

April 7, 2021

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दिन सात: हिंदी से नफरत करने से हिंदी बहुत पसंद करने तक

जब मैं अपनी विश्विविधलाय की पड़ाई शरू की तब मैंने पहली बार हिंदी की कक्षाएँ ले दी थीं । मुझे उन कक्षाएँ अच्छी नहीं लगती थीं । मेरे लिए उन कक्षाएं इतनी खराब थीं कि मैं सच में हिंदी से नफरत करने लगी । उस एक बहुत बुरी बात थी । शायद आपको याद हो कि मैंने दूसरे जर्नल में लिखा कि मुझे अपने हिंदी का अध्यापाक पसंद नहीं था । उसने हमेशा कहता रहा था कि मैं एक अच्छी छात्र नहीं थी लेकिन असल में मेरे लिए वह एक बुरा अध्यापाक था । मैंने यह पता चला जब मैं पहली बार भारत गयी । वहाँ मैंने छह हफ़्ते के लिए The Landour Language School में हिंदी पढ़ी । यह एक प्रसिध स्कूल है, जो लण्ढोर में है । लण्ढोर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के देहरादून ज़िले में स्थित एक नगर है । स्कूल में सब अध्यापिका और अध्यापाक बहुत अच्छे थे । उनकी वजह से मुझे एक बार फिर हिंदी सीखना अच्छी लगी । उन्होंने मेरे लिए एक महत्वपूर्ण द्वार खुला रखा था । मुझे आशा है कि मैं एक दिन जल्दी ही वहाँ वापस आऊँगी ।

आजकल हर हफ़्ते गुरुवार को दोपहर में मैं अपने हिंदी की अध्यापाक के साथ मिलती हूँ । मुझे जयबोध जी अच्छे लगते हैं । वे हमेशा समय पर हैं । हर कक्षा दिलचस्प होती है । और धीरे-धीरे मेरी हिंदी बेहतर हो रही है । काश मेरा पहला अध्यापाक जयबोध जी जैसा होता था ।


I first starting learning Hindi at University. I really didn't like those classes. The classes were so bad for me that I truly came to hate Hindi. This was a very bad thing (/ really bad development). Perhaps you may remember that in a different journal (entry) I wrote that I didn't like my Hindi teacher. He continuously said that I was a bad student but in reality he was a bad teacher for me. I came to know this when I went to India for the first time. There I studied Hindi for six weeks at the Landour Language School. This is a famous school which is in Landour. Landour is city situated in the Dehradun district of Uttarakhand state in India. At the school, all the teachers were great. It's because of them that I once again loved learning hindi. They kept an important door open for me. I hope to go back there one day soon.

These days I take Hindi lessons every week on Thursday in the afternoon with a teacher. I really like Jaibodh ji. He is always on time. The lessons are interesting. And slowly but surely my Hindi is improving. If only my first teacher had been like Jaibodh.

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April 9, 2021

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April 9, 2021

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April 15, 2021

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हिंदी से नफरत करने से हिंदी बहुत पसंद करने तक


जब मैं अपनी विश्विविधलाय की पड़ाई शरू की तब मैंने पहली बार हिंदी की कक्षाएँ ले दी थीं । मुझे उन कक्षाएँ अच्छी नहीं लगती थीं । मेरे लिए उन कक्षाएं इतनी खराब थीं कि मैं सच में हिंदी से नफरत करने लगी । उस एक बहुत बुरी बात थी । शायद आपको याद हो कि मैंने दूसरे जर्नल में लिखा कि मुझे अपने हिंदी का अध्यापाक पसंद नहीं था । उसने हमेशा कहता रहा था कि मैं एक अच्छी छात्र नहीं थी लेकिन असल में मेरे लिए वह एक बुरा अध्यापाक था । मैंने यह पता चला जब मैं पहली बार भारत गयी । वहाँ मैंने छह हफ़्ते के लिए The Landour Language School में हिंदी पढ़ी । यह एक प्रसिध स्कूल है, जो लण्ढोर में है । लण्ढोर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के देहरादून ज़िले में स्थित एक नगर है । स्कूल में सब अध्यापिका और अध्यापाक बहुत अच्छे थे । उनकी वजह से मुझे एक बार फिर हिंदी सीखना अच्छी लगी । उन्होंने मेरे लिए एक महत्वपूर्ण द्वार खुला रखा था । मुझे आशा है कि मैं एक दिन जल्दी ही वहाँ वापस आऊँगी ।


जब मैंने अपनी विश्विविधलाद्यालय की प़ाई शरू की तब मैंने पहली बार हिंदी की कक्षाएँ ले दीगाईं थीं । मुझे उनवह कक्षाएँ अच्छी नहीं लगती थीं । मेरे लिए उनवो कक्षाएं इतनी खराब थीं कि मैं सच में हिंदी से नफरत करने लगी । उस एकथी जो कि बहुत बुरी बात थी । शायद आपको याद हो कि मैंने अपने दूसरे जर्नल में लिखा था कि मुझे अपने हिंदी का अध्यापक पसंद नहीं थउसनवह मुझसे हमेशा कहत रहते कि मैं एक अच्छी छात्र नहीं थी लेकिन असल में, मेरे लिए वह एक बुर अध्यापक थ। मैंने यहुझे ये तब पता चला जब मैं पहली बार भारत गयी । वहाँ मैंने छह हफ्तों के लिए The Landour Language School में हिंदी पढ़ी । यह एक प्रसिद्ध स्कूल है, जो लण्ढोर में स्थित है । लण्ढोर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के देहरादून ज़िले में स्थित एक नगर है । स्कूल में सबके सभी अध्यापिका औरक - अध्यापाक बहुतिकाएं अच्छे थे । उनकी वजह से मुझे एक बार फिर हिंदी सीखना अच्छा लगने लग । उन्होंने मेरे लिए एक महत्वपूर्ण द्वार खुला रखा था । मुझे आशा है कि मैं एक दिन जल्दी हीअवश्य वहाँ वापस जाऊँगी । जब मैंने अपनी विश्वविद्यालय की प़ाई शरू की तब मैंने पहली बार हिंदी की कक्षाएँ लगाईं थीं । मुझे वह कक्षाएँ अच्छी नहीं लगती थीं । मेरे लिए वो कक्षाएं इतनी खराब थीं कि मैं सच में हिंदी से नफरत करने लगी थी जो कि बहुत बुरी बात थी । शायद आपको याद हो कि मैंने अपने दूसरे जर्नल में लिखा था कि मुझे अपने हिंदी का अध्यापक पसंद नहीं थवह मुझसे हमेशा कहत रहते कि मैं एक अच्छी छात्र नहीं थी लेकिन असल में, मेरे लिए वह एक बुर अध्यापक थ। मुझे ये तब पता चला जब मैं पहली बार भारत ग । वहाँ मैंने छह हफ्तों के लिए The Landour Language School में हिंदी पढ़ी । यह एक प्रसिद्ध स्कूल है, जो लण्ढोर में स्थित है । लण्ढोर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के देहरादून ज़िले में स्थित एक नगर है । स्कूल के सभी अध्यापक - अध्यापिकाएं अच्छे थे । उनकी वजह से मुझे एक बार फिर हिंदी सीखना अच्छा लगने लग । उन्होंने मेरे लिए एक महत्वपूर्ण द्वार खुला रखा था। मुझे आशा है कि मैं एक दिन अवश्य वहाँ वापस जाऊँगी ।

उन्होंने मेरे लिए एक महत्वपूर्ण द्वार खुला रखा था। It's grammatically correct but does it mean?

आजकल हर हफ़्ते गुरुवार को दोपहर में मैं अपने हिंदी की अध्यापाक के साथ मिलती हूँ । मुझे जयबोध जी अच्छे लगते हैं । वे हमेशा समय पर हैं । हर कक्षा दिलचस्प होती है । और धीरे-धीरे मेरी हिंदी बेहतर हो रही है । काश मेरा पहला अध्यापाक जयबोध जी जैसा होता था ।


आजकल हर हफ़्ते गुरुवार को दोपहर में मैं अपने हिंदी की अध्यापक के साथ मिलती हूँ जिनका नाम जयबोध है । मुझे जयबोध जी अच्छे लगते हैं । वे हमेशा समय परसमयनिष्ठ हैं । उनकी हर कक्षा दिलचस्प होती है और धीरे-धीरे मेरी हिंदी बेहतर हो रही है । काश मेरा पहला अध्यापक जयबोध जी जैसा होता था आजकल हर हफ़्ते गुरुवार को दोपहर में मैं अपने हिंदी की अध्यापक क मिलती हूँ जिनका नाम जयबोध है । मुझे जयबोध जी अच्छे लगते हैं । वे समयनिष्ठ हैं । उनकी हर कक्षा दिलचस्प होती है और धीरे-धीरे मेरी हिंदी बेहतर हो रही है । काश मेरा पहला अध्यापक जयबोध जी जैसा होता

समयनिष्ठ - punctual

दिन सात: हिंदी से नफरत करने से हिंदी बहुत पसंद करने तक


दिन सात: हिंदी सेको नफरत करने से लेकर हिंदी को बहुत पसंद करने तक दिन सात: हिंदी को नफरत करने से लेकर हिंदी को बहुत पसंद करने तक

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